क्यों ये इश्क़ वाला दर्द हो रहा है मुझे,
क्यों तेरी एक मुस्कान का दीवाना हुआ हूं मैं,
क्यों तेरी मुसकुराहट में किराये का मकान ढूंढ रहा हू मैं,
क्यों तेरी अनगिनत बातो को सुन रहा हु मैं,
क्यों तेरे साथ चाय पीने का नशा सा है,
क्यों तेरे साथ जीने का मज़ा सा है,
क्यों अनजाने में जानबूझकर इश्क़ कर लिया है तुझसे मैंने,
क्यों ये इश्क़ वाला दर्द हो रहा है मुझे।
क्यों तेरी हर एक बात को मान लेता हूं मैं,
क्यों बिन कहे सब कुछ समझ लेता हूं मैं,
क्यों तेरी हर नादानिया प्यारा से लगता है,
क्यों तुझे खो देने का डर सा लगता है,
क्या तूझे भी मेरे लिए ये सब एहसास होता है,
या सिर्फ मुझे ही...
इश्क़ वाला दर्द हो रहा है।
No comments:
Post a Comment